पूजा विधि

लक्ष्मी पूजा विधि: दीपावली और घर पर माता लक्ष्मी की पूजा कैसे करें

प्रकाशन: 2 अक्टूबर 2026 अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026 4 मिनट

माता लक्ष्मी की पूजा धन, समृद्धि, सुख और संतान के कल्याण के लिए की जाती है। दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा सबसे प्रचलित है, लेकिन वर्षपूजा, पूर्णिमा, सोमवार और शुक्रवार को भी घर पर सरल लक्ष्मी पूजा की जा सकती है। यहां सामग्री, स्थापना, पंचोपचार क्रम, मंत्र, भोग और आरती की पूरी विधि है।

लक्ष्मी पूजा के साथ गणेश पूजा करना शुभ माना जाता है, क्योंकि बिना विघ्ननाशक गणेश की कृपा के लक्ष्मी का स्थायी निवास नहीं होता — यही परंपरागत भाव है।

लक्ष्मी पूजा कब करें

  • दीपावली — कार्तिक अमावस्या की संध्या में मुख्य लक्ष्मी पूजा।
  • वर्षपूजा — दीपावली से पहले का वर्षगांठ समारोह।
  • पूर्णिमा — हर माह की पूर्णिमा को सरल पूजा।
  • शुक्रवार — माता लक्ष्मी के दिन सरल व्रत-पूजा।
  • हर शुभ आरंभ में — गणेश के साथ लक्ष्मी जी का स्मरण।

लक्ष्मी पूजा की सामग्री

  • लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति या चित्र।
  • जल, पंचामृत, गंगाजल (उपलब्ध हो तो)।
  • चंदन, रोली-कुमकुम, अक्षत, हल्दी।
  • ताजे लाल या पीले पुष्प, कमल-गट्टा या आक के पुष्प।
  • घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, कपूर।
  • सामान्य पूजा का लाल कपड़ा, चौकी का आसन।
  • नैवेद्य — खीर, मिष्ठान्न, मौसमी फल, पंचमेवा।
  • सुपारी, लौंग, पान-सुपारी, दक्षिणा-सामग्री।

विस्तृत सूची पूजा सामग्री लिस्ट में उपलब्ध है; कलश-आदि की सामग्री कलश स्थापना विधि लेख में है।

लक्ष्मी पूजा विधि कदम-दर-कदम

  1. स्थापना — चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
  2. संकल्प — जल-अक्षत से पूजा का निश्चय करें। विधि पूजा में संकल्प कैसे लें में है।
  3. गणेश पूजन — सबसे पहले गणेश जी की सरल पूजा करें। क्रम गणेश पूजा विधि में है।
  4. कलश और दीप — यदि विधिवत पूजा है तो कलश स्थापित करें, फिर दीप और धूप जलाएं।
  5. ध्यान — “ॐ ह्रीं श्रीमात्रे नमः” या माता लक्ष्मी के ध्यान-मंत्र का उच्चारण करते हुए मन में स्मरण करें।
  6. पंचोपचार उपचार — गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें। विशेष अवसर पर षोडशोपचार कर सकते हैं — अंतर पंचोपचार और षोडशोपचार में देखें।
  7. मंत्र-जप — “ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः” की कम से कम 11, 21 या 108 आवृत्ति करें।
  8. भोग — खीर, मिष्ठान्न, फल और पंचमेवा अर्पित करके कुछ समय सामने रखें।
  9. परिक्रमा और प्रणाम — लक्ष्मी जी की परिक्रमा करके प्रणाम करें।
  10. आरती — “ॐ जय लक्ष्मी माता” या सरल आरती करें; विधि आरती कैसे करें में है।
  11. प्रसाद — नैवेद्य सभी में बांटकर पूजा समाप्त करें।

लक्ष्मी पूजा के मंत्र

  • बीज मंत्र: “ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः”
  • प्रचलित ध्यान: “ॐ ह्रीं श्रीमात्रे नमः”
  • सरल प्रार्थना: “हे माता लक्ष्मी, हमारे घर में सुख-समृद्धि और सत्कर्म का निवास बनाए रखें।”

लक्ष्मी पूजा के नियम

  • पूजा से पहले घर की साफ-सफाई और रोशनी की जाती है — लक्ष्मी जी को स्वच्छता और प्रकाश प्रिय है।
  • कर्ज, अव्यवस्था और टूटा-फूटा सामान दूर करने का प्रचलित भाव है।
  • दीपावली की पूजा संध्या में की जाती है; शुक्रवार की पूजा दोपहर या संध्या में कर सकते हैं।
  • मांस-मदिरा और कलह से दूर रहकर पूजा करने का नियम है।
  • नैवेद्य सात्त्विक और ताजा रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लक्ष्मी पूजा में गणेश जी क्यों रखते हैं?

परंपरा के अनुसार विघ्ननाशक गणेश की कृपा से लक्ष्मी जी का स्थायी निवास होता है, इसलिए दोनों की साथ पूजा की जाती है।

दीपावली की लक्ष्मी पूजा किस समय करें?

सूर्यास्त के बाद, प्रदोष या संध्या के समय प्रचलन है। जो समय घर में परिवार साथ हो, उसी समय पूजा करें।

क्या लक्ष्मी पूजा अकेले कर सकते हैं?

हां। विधि का पालन करते हुए अकेले या परिवार के साथ दोनों तरह पूजा की जा सकती है।

लक्ष्मी पूजा का प्रसाद क्या हो?

खीर, मिष्ठान्न, फल और पंचमेवा प्रचलित प्रसाद हैं। उपलब्ध सामग्री से भोग लगाया जा सकता है।

निष्कर्ष

लक्ष्मी पूजा का सार है — स्वच्छता, संतुलित खर्च, सत्कर्म और श्रद्धापूर्वक किया गया नियमित आराधना। विधि चाहे सरल हो या षोडशोपचार, उसे पूरे भाव से करें।

आगे पढ़ें — पूजा विधि — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका, गणेश पूजा विधि, कलश स्थापना विधि और घर पर दैनिक पूजा विधि।