पूजा विधि

आरती कैसे करें: सही विधि, सामग्री, नियम और आरती के बाद क्या करें

प्रकाशन: 2 अक्टूबर 2026 अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026 3 मिनट

आरती पूजा का अंतिम और सबसे लोकप्रिय चरण है — दीपक या कपूर को गोलाकार घुमाकर भगवान की आरती उतारी जाती है, घंटी बजाई जाती है और अंत में लौ को हाथों से छूकर आशीर्वाद लिया जाता है। आरती की विधि सरल है, लेकिन कुछ नियम हैं जो जानने योग्य हैं।

हर देवता की अपनी आरती होती है — जैसे शिव की ॐ जय शिव ओंकारा आरती — लेकिन आरती करने का तरीका सब में एक जैसा ही रहता है।

आरती की थाली की सामग्री

  • आरती की थाली या चौकी।
  • घी या तेल का दीपक, रुई की बाती — या कपूर।
  • घंटी या घड़ियाल।
  • धूप-अगरबत्ती और आरती का छोटा पत्र।
  • पुष्प और अक्षत।
  • नैवेद्य के लिए फल या मिठाई।

पूरी सामग्री सूची पूजा सामग्री लिस्ट में देखें।

आरती की सही विधि

  1. थाली तैयार करें — थाली में दीपक (या कपूर), घंटी, थोड़े फूल और अक्षत रखें।
  2. पूजा-स्थान साफ करें — देवता के सामने नैवेद्य हटाएं या ओढ़कर रखें ताकि लौ उससे न टकराए।
  3. दीपक जलाएं — घी का दीपक जलाएं या कपूर पर आग लगाएं। कपूर के साथ रुई न रखें।
  4. आरती घुमाएं — दीपक को देवता के सामने से दाहिनी ओर शुरू करते हुए गोलाकार घुमाएं। एक, तीन या पांच बार घुमाने का प्रचलन है।
  5. घंटी बजाएं — दूसरे हाथ से आरती के समय घंटी बजाएं।
  6. आरती गाएं — देवता की प्रचलित आरती गाएं या “ॐ जय जगदीश हरे…” जैसी सरल आरती पढ़ें।
  7. लौ ग्रहण करें — आरती के बाद दोनों हाथों की हथेलियों से लौ को छूकर आंखों और माथे पर लगाएं।
  8. प्रणाम — हाथ जोड़कर प्रणाम करें और प्रसाद वितरण से पूजा समाप्त करें।

आरती के नियम

  • दीपक को कभी देवता की मूर्ति के पीछे से न घुमाएं — सामने से शुरू करें।
  • लौ उंगलियों से छूते समय सावधान रहें; कपूर की लौ बड़ी और गर्म होती है।
  • आरती के बाद दीपक जलता छोड़ दें या सुरक्षित स्थान पर रखें।
  • घंटी आरती के समय बजाना चाहिए; अनावश्यक देर तक न बजाएं।
  • सर्दी या हवा में दीपक की लौ की सुरक्षा का ध्यान रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आरती कितनी बार घुमानी चाहिए?

तीन या पांच बार घुमाने का प्रचलन है। कुछ परंपराओं में एक बार भी पर्याप्त माना जाता है।

क्या आरती में कपूर और दीपक दोनों जला सकते हैं?

हां — पहले दीपक से आरती करके उसे रखें, फिर कपूर जलाकर उसकी आरती कर सकते हैं। दोनों साथ लेकर घुमाना कठिन और असुरक्षित है।

आरती के बाद दीपक का क्या करना चाहिए?

पूजा-स्थान के पास सुरक्षित स्थान पर जलता छोड़ दें या बुझाकर रख दें। आरती की लौ से प्रसाद लिया जाता है, फिर दीपक को हाथ नहीं लगाया जाता।

बिना घंटी के आरती हो सकती है?

हां। घंटी उपलब्ध न हो तो केवल दीपक से आरती और प्रार्थना भी पूर्ण मानी जाती है।

आरती में कितने दीपक रखने चाहिए?

सामान्यतः एक दीपक पर्याप्त है। विशेष आरती में पंचदीप (पांच दीपक) का भी प्रचलन है।

निष्कर्ष

आरती का सार है — शुद्ध लौ, गोलाकार क्रम, घंटी की ध्वनि और लौ ग्रहण करके आशीर्वाद लेना। पूजा चाहे सरल हो या विस्तृत, अंत में आरती और प्रार्थना उसे पूर्ण करती है।

आगे पढ़ें — पूजा विधि — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका, शिव आरती: ॐ जय शिव ओंकारा और घर पर दैनिक पूजा विधि।