पूजा विधि

पूजा में संकल्प कैसे लें: संकल्प का अर्थ, विधि और प्रचलित प्रार्थना

प्रकाशन: 2 अक्टूबर 2026 अंतिम अपडेट: 2 अक्टूबर 2026 4 मिनट

संकल्प पूजा या व्रत की शुरुआत में लिया जाने वाला निश्चय है — कौन पूजा कर रहा है, कहां, किस दिन और किस कामना के लिए। हाथ में जल और अक्षत लेकर पढ़ा जाने वाला संकल्प ही पूजा को “विधिवत” बनाता है। यहां संकल्प का अर्थ, उसके चार अंग और सरल हिंदी विधि दी गई है।

दैनिक सरल पूजा में संकल्प छोटा हो सकता है, जबकि व्रत, पर्व या अनुष्ठान में विधिवत संकल्प लिया जाता है।

संकल्प क्या होता है

संकल्प का भाव है — “आज मैं यह पूजा इस स्थान पर, इस तिथि पर, अपने और परिवार के कल्याण के लिए कर रहा/रही हूं।” इससे पूजा का उद्देश्य स्पष्ट होता है और मन एकाग्र होता है।

संकल्प के चार अंग

  1. स्थान — जहां पूजा हो रही है, जैसे नगर, गांव या घर का नाम।
  2. काल — तिथि, वार, नक्षत्र और संवत्/साल (ज्ञात हो तो)।
  3. नाम-गोत्र — पूजा करने वाले का नाम और परिवार का गोत्र या वंश-परंपरा (ज्ञात हो तो)।
  4. अभीष्ट कामना — पूजा का उद्देश्य, जैसे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, व्रत की पूर्ति या कोई विशेष मनोकामना।

संकल्प लेने की विधि

  1. दाहिने हाथ में सामग्री लें — थोड़ा जल और चावल (अक्षत) दाहिनी हथेली में लें; जल को अंगूठे से दबाकर रखें।
  2. हाथ को नाभि के पास लाएं — दाहिने हाथ को नाभि के नीचे रखकर बाएं हाथ से सहारा देने की रीति है।
  3. मंत्र या प्रार्थना बोलें — विधिवत संकल्प-मंत्र योग्य आचार्य या पुस्तक से लें; सरल विकल्प नीचे दिया गया है।
  4. चारों अंग बोलें — स्थान, तिथि-वार, नाम-गोत्र और अभीष्ट कामना शामिल करें।
  5. जल अर्पित करें — संकल्प के अंत में हाथ का जल और चावल देवता के चरणों में अर्पित कर दें।
  6. पूजा आरंभ करें — इसके बाद गणेश ध्यान और मुख्य पूजा-क्रम शुरू करें।

सरल हिंदी संकल्प — उदाहरण

मंत्र याद न हो तो यह सरल प्रार्थना बोली जा सकती है:

“मैं [नाम] आज [तिथि-वार] के दिन, इस [स्थान] पर यह पूजा/व्रत अपने और परिवार के सुख, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कर रहा/रही हूं। यह पूजा विधिपूर्वक संपन्न हो।”

इसी तरह व्रत का संकल्प: “मैं [नाम] आज [व्रत का नाम] का व्रत रखकर [देवता] की पूजा कर रहा/रही हूं; मेरा यह व्रत सफल हो।”

संकल्प कब लेना चाहिए

  • हर व्रत और पर्व पूजा की शुरुआत में।
  • विशेष अनुष्ठान — कलश स्थापना, हवन या गृहप्रवेश — से पहले।
  • नियमित दैनिक पूजा में छोटे रूप में (केवल “यह पूजा शुभ हो” का भाव)।
  • मनोकामना पूजा में, जहां अभीष्ट स्पष्ट रूप से बोला जाता है।

संकल्प के नियम

  • संकल्प लेते समय एकाग्र रहें; जल और अक्षत हाथ से न गिराएं पहले।
  • तिथि और वार ज्ञात हो तो बोलें, न ज्ञात हो तो “आज” कहकर भी संकल्प मान्य है।
  • गोत्र ज्ञात न हो तो पिता या दादा का नाम बोलने का प्रचलन है।
  • संकल्प वही व्यक्ति ले जो पूजा कर रहा है।
  • बड़े अनुष्ठान में विधिवत मंत्र के लिए आचार्य से मार्गदर्शन लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या हर पूजा में संकल्प लेना जरूरी है?

रोज़ की सरल पूजा में छोटा भाव-संकल्प पर्याप्त है। व्रत, पर्व और अनुष्ठान में विधिवत संकल्प लेना उचित माना जाता है।

संकल्प में गोत्र नहीं पता तो क्या करें?

पिता या दादा का नाम बोलने का प्रचलन है; वह भी ज्ञात न हो तो केवल अपना नाम और अभीष्ट बोलकर संकल्प किया जा सकता है।

संकल्प के लिए मंत्र जरूरी है?

मंत्र से विधि पूर्णता पाती है, लेकिन स्पष्ट भाव से बोला गया हिंदी संकल्प भी मान्य है। विधिवत मंत्र योग्य स्रोत या आचार्य से लें।

संकल्प कितनी बार बोलना चाहिए?

एक बार पर्याप्त है। कुछ परंपराओं में तीन बार दोहराने का भी उल्लेख है।

निष्कर्ष

संकल्प पूजा को दिशा देता है — स्थान, काल, नाम और कामना के स्पष्ट होते ही पूजा का क्रम आगे बढ़ता है। मंत्र याद न हो तो सरल हिंदी प्रार्थना से भी संकल्प पूरा होता है।

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