Hindu Vrat aur Tyohar 2026 List: महीने-वार हिंदू व्रत और त्योहार की सूची, तिथि और विशेष महत्व
Hindu Vrat aur Tyohar 2026 की यह सूची (List) चैत्र से फाल्गुन तक पूरे वर्ष के प्रमुख व्रत और त्योहार एक जगह लाती है — तिथि, दिन और विशेष महत्व के साथ। हिंदू पंचांग में हर मास के अपने व्रत, एकादशी, पूर्णिमा और पर्व होते हैं; कुछ पूरे भारत में मनाए जाते हैं, तो कुछ क्षेत्र या परिवार-विशेष से जुड़े होते हैं।
इस लेख में आपको 2026 के व्रत-त्योहारों की महीने-वार तालिका मिलेगी — होली, चैत्र नवरात्रि, रक्षा बंधन, गणेश चतुर्थी, शरद नवरात्रि, करवा चौथ, दीपावली, छठ से लेकर माघ और फाल्गुन के व्रतों तक। साथ में व्रत रखने के सामान्य नियम और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न भी दिए गए हैं।
चैत्र: हिंदू नववर्ष, नवरात्रि और राम नवमी
चैत्र हिंदू कैलेंडर का पहला मास है। इसी से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का आरंभ होता है। इस मास व्रत-पर्वों की शुरुआत शक्ति-उपासना से होती है और अंत कामदा एकादशी तक होता है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| चैत्र, शुक्ल प्रतिपदा | गुड़ी पड़वा, उगादी, चैत्र नवरात्रि — 19 मार्च (गुरुवार) | हिंदू नववर्ष, घटस्थापना और शक्ति के नौ दिन |
| चैत्र, शुक्ल पक्ष | चेती चांद — 20 मार्च (शुक्रवार) | सिंधी समुदाय का नववर्ष और जोगियों की आराधना |
| चैत्र, शुक्ल नवमी | राम नवमी — 26 मार्च (गुरुवार) (कुछ स्थानों पर 27 मार्च) | भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव, नवरात्रि का पारणा |
| चैत्र, शुक्ल एकादशी | कामदा एकादशी — 29 मार्च (रविवार) | मनोकामना पूर्ति और पाप-मोचन के लिए एकादशी व्रत |
| चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा | हनुमान जयंती, चैत्र पूर्णिमा — 1 अप्रैल (बुधवार) | बजरंगबली की जयंती और चैत्री पूर्णिमा स्नान |
नवरात्रि में कलश स्थापना के साथ नौ दिन की विधि निभाई जाती है; कलश स्थापना की सही तिथि और मुहूर्त स्थानीय पंचांग से देखें।
वैशाख: अक्षय तृतीया, मोहिनी एकादशी और बुद्ध पूर्णिमा
वैशाख मास में शुभ कार्यों की परंपरा सबसे प्रबल है — अक्षय तृतीया पर स्वर्ण और दान का विशेष महत्व है, तो बुद्ध पूर्णिमा शांति और ज्ञान का पर्व।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| वैशाख, शुक्ल तृतीया | अक्षय तृतीया — 19 अप्रैल (रविवार) | दान, स्वर्ण और नए कार्यारंभ का शुभ दिन |
| वैशाख, शुक्ल एकादशी | मोहिनी एकादशी — 27 अप्रैल (सोमवार) | भगवान विष्णु की उपासना, मोह-मुक्ति का व्रत |
| वैशाख, शुक्ल चतुर्दशी | नरसिंह जयंती — 30 अप्रैल (गुरुवार) | भगवान नरसिंह का अवतार और भक्त प्रह्लाद की रक्षा |
| वैशाख, शुक्ल पूर्णिमा | बुद्ध पूर्णिमा — 1 मई (शुक्रवार) | गौतम बुद्ध का जन्म, अहिंसा और ज्ञान का दिन |
| वैशाख, कृष्ण एकादशी | अपरा एकादशी — 13 मई (बुधवार) | अपार पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी, पाप-क्षय |
| वैशाख, कृष्ण अमावस्या | वट सावित्री व्रत — 16 मई (शनिवार) | विवाहित महिलाओं का सौभाग्य और पति-आयु व्रत |
वट सावित्री व्रत की कथा सावित्री-सत्यवान से जुड़ी है, जिसमें सत्यवान के प्राणों की रक्षा सावित्री ने यमराज से की थी।
ज्येष्ठ: निर्जला एकादशी, गंगा दशहरा और वट पूर्णिमा
2026 में ज्येष्ठ के बाद अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) पड़ने से इस मास के कुछ पर्व जून में आ रहे हैं — अर्थात मई के अंत में अधिक मास आने के कारण निर्जला एकादशी और वट पूर्णिमा जून में मनाई जाएगी। ज्येष्ठ का सबसे कठोर व्रत निर्जला एकादशी है, जिसमें सूर्योदय से अगले दिन पारणा तक जल ग्रहण नहीं किया जाता।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी | अपरा एकादशी — 13 मई (बुधवार) | अपार पुण्य की एकादशी; जल-ग्रहण के साथ व्रत |
| ज्येष्ठ, कृष्ण अमावस्या | वट सावित्री व्रत — 16 मई (शनिवार) | वट वृक्ष के नीचे सावित्री-सत्यवान की कथा और सौभाग्य व्रत |
| ज्येष्ठ, शुक्ल दशमी | गंगा दशहरा — 24 जून (बुधवार) | गंगाजी के अवतरण का उत्सव, स्नान-दान का विशेष पुण्य |
| ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी | निर्जला एकादशी — 25 जून (गुरुवार) | वर्ष का सबसे कठोर एकादशी व्रत; बिना जल उपवास |
| ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा | वट पूर्णिमा (वात सावित्री) — 29 जून (सोमवार) | वट वृक्ष पूजा और विवाहित जीवन की रक्षा का व्रत |
एकादशी का व्रत साल में चौबीस बार आता है; हर एकादशी का नाम, विधि और पारणा का समय अलग होता है। पारणा सदैव द्वितीया तिथि में, सूर्योदय के बाद किया जाता है।
आषाढ़: रथ यात्रा, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा
आषाढ़ मास में चतुर्मास का आरंभ होता है। देवशयनी एकादशी के बाद विवाह, गृहप्रवेश और नए शुभ कार्य रुक जाते हैं, जो देवउठनी एकादशी पर पुनः प्रारंभ होते हैं।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| आषाढ़, शुक्ल द्वितीया | जगन्नाथ रथ यात्रा — 16 जुलाई (गुरुवार) | पुरी में भगवान जगन्नाथ की विशाल रथ यात्रा |
| आषाढ़, शुक्ल एकादशी | देवशयनी एकादशी (हरिशयनी) — 25 जुलाई (शनिवार) | भगवान विष्णु की योगनिद्रा; चतुर्मास का आरंभ |
| आषाढ़, शुक्ल पूर्णिमा | गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) — 29 जुलाई (बुधवार) | गुरु और संतों के प्रति आभार; मंत्र-दीक्षा का दिन |
चतुर्मास के चार महीनों में शुभ कार्य रोकने की परंपरा का आधार देवशयनी एकादशी है; इसी दिन से कलश स्थापना और विशेष पूजाओं का क्रम भी बदल जाता है — विवरण पूजा विधि लेख में है।
श्रावण (सावन): सोमवार व्रत, नाग पंचमी और रक्षा बंधन
सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त 2026 तक रहेगा। यह मास भगवान शिव की आराधना का मास माना जाता है — इसमें चार सोमवार व्रत पड़ते हैं, साथ ही हरियाली तीज, नाग पंचमी और रक्षा बंधन जैसे पर्व आते हैं।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| श्रावण, सोमवार | सावन सोमवार व्रत — 3, 10, 17 और 24 अगस्त (सोमवार) | शिवजलाभिषेक और सोमवार व्रत का विशेष फल |
| श्रावण, शुक्ल तृतीया | हरियाली तीज — 15 अगस्त (शनिवार) | सौभाग्य व्रत; सावन के झूले, मेहंदी और हरे वस्त्र |
| श्रावण, शुक्ल पंचमी | नाग पंचमी — 17 अगस्त (सोमवार) | नाग देवता की पूजा; कालसर्प दोष से मुक्ति की परंपरा |
| श्रावण, शुक्ल एकादशी | पुत्रदा एकादशी — 23 अगस्त (रविवार) | संतान प्राप्ति और संतान-कल्याण के लिए व्रत |
| श्रावण, शुक्ल पूर्णिमा | रक्षा बंधन — 28 अगस्त (शुक्रवार) | भाई-बहन के संरक्षण का पर्व; रक्षासूत्र बंधन |
सावन सोमवार के व्रत की पूजा विधि, कथा और नियम सोमवार व्रत पूजा विधि लेख में विस्तार से दिए गए हैं। काजरी तीज भाद्रपद कृष्ण तृतीया को मनाई जाती है; उसकी तिथि स्थानीय पंचांग से देखें।
भाद्रपद: जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और पितृ पक्ष
भाद्रपद के मास में दो सबसे बड़े पर्व — श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी — आते हैं। मास के अंत में पितृ पक्ष प्रारंभ होता है, जो सर्वपित्री अमावस्या तक चलता है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| भाद्रपद, कृष्ण अष्टमी | श्रीकृष्ण जन्माष्टमी — 4 सितंबर (शुक्रवार) (स्मार्ता परंपरा में 3 सितंबर) | मध्यरात्रि पर भगवान कृष्ण का जन्म; निर्जला व्रत |
| भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी | हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी — 14 सितंबर (सोमवार) | सौभाग्य व्रत और गणेशोत्सव का दस-दिवसीय आरंभ |
| भाद्रपद, शुक्ल एकादशी | परिवर्तिनी एकादशी — 22 सितंबर (मंगलवार) | भगवान विष्णु का शयनसे जागरण; चतुर्मास समापन |
| भाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी | अनंत चतुर्दशी — 25 सितंबर (शुक्रवार) | गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्थी व्रत |
| भाद्रपद, शुक्ल पूर्णिमा | भाद्रपद पूर्णिमा — 26 सितंबर (शनिवार) | पूर्णिमा व्रत; इसी दिन से पितृ पक्ष का आरंभ |
| भाद्रपद, कृष्ण पक्ष | पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) — 27 सितंबर से 10 अक्टूबर | पितरों के तर्पण, श्राद्ध और दान का पक्ष |
गणेश चतुर्थी की स्थापना, मंत्र और विसर्जन की पूरी विधि गणेश पूजा विधि में पढ़ें। जन्माष्टमी पर निर्जला व्रत रखकर मध्यरात्रि में कृष्ण जन्म की कथा और पूजा की जाती है।
अश्विन: शरद नवरात्रि, दशहरा और शरद पूर्णिमा
अश्विन मास का सबसे बड़ा पर्व-समूह शरद नवरात्रि से दशहरा तक फैला रहता है। इसी मास में पितृ पक्ष का समापन, घटस्थापना और अंत में शरद पूर्णिमा का कोजागरी उत्सव आता है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| अश्विन, कृष्ण अमावस्या | सर्वपित्री अमावस्या — 10 अक्टूबर (शनिवार) | पितृ पक्ष का समापन; सर्व पितरों का तर्पण |
| अश्विन, शुक्ल प्रतिपदा | शरद नवरात्रि, घटस्थापना — 11 अक्टूबर (रविवार) | मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना; कलश स्थापना |
| अश्विन, शुक्ल दशमी | दशहरा (विजयादशमी) — 20 अक्टूबर (मंगलवार) | रावण वध और अधर्म पर धर्म की विजय |
| अश्विन, शुक्ल एकादशी | पापांकुशा एकादशी — 22 अक्टूबर (गुरुवार) | पापों के नाश के लिए विष्णु व्रत |
| अश्विन, शुक्ल पूर्णिमा | शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) — 25 अक्टूबर (रविवार) | चंद्रमा की किरणों में खीर; लक्ष्मी-पूजा का रात्रि-पर्व |
नवरात्रि में कलश स्थापना और दुर्गा सप्तशती पाठ की विधि कलश स्थापना विधि में है। नौ दिन में दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और अंत में कन्या पूजन किया जाता है।
कार्तिक: करवा चौथ, दीपावली, छठ और देवउठनी एकादशी
कार्तिक मास व्रत-त्योहारों का सबसे घना मास है — करवा चौथ से लेकर धनतेरस, दीपावली, गोवर्धन, भाई दूज, छठ पूजा और देवउठनी एकादशी तक, लगभग हर दिन कोई न कोई व्रत या पर्व रहता है। दीपावली पर लक्ष्मी पूजा की विधि सबसे अधिक पूछी जाती है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| कार्तिक, कृष्ण चतुर्थी | करवा चौथ — 29 अक्टूबर (गुरुवार) | विवाहित महिलाओं का अखंड सौभाग्य व्रत; चंद्र दर्शन |
| कार्तिक, कृष्ण अष्टमी | अहोई अष्टमी — 2 नवंबर (सोमवार) | संतान की सुरक्षा और आयु के लिए व्रत |
| कार्तिक, कृष्ण एकादशी | रमा एकादशी — 5 नवंबर (गुरुवार) | भगवान विष्णु और देवी रामा की उपासना |
| कार्तिक, कृष्ण त्रयोदशी | धनतेरस — 6 नवंबर (शुक्रवार) | धन्वंतरि जयंती; बर्तन और स्वास्थ्य का शुभ क्रय |
| कार्तिक, कृष्ण चतुर्दशी | काली चौदस — 7 नवंबर (शनिवार) | यम-काली पूजा और तेल-मालिश की परंपरा |
| कार्तिक, कृष्ण अमावस्या | नरक चतुर्दशी और दीपावली — लक्ष्मी पूजा — 8 नवंबर (रविवार) | प्रकाश पर्व; लक्ष्मी-गणेश पूजा, दीप और रोशनी |
| कार्तिक, शुक्ल प्रतिपदा | गोवर्धन पूजा, अन्नकूट — 10 नवंबर (मंगलवार) | भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का स्मरण |
| कार्तिक, शुक्ल द्वितीया | भाई दूज — 11 नवंबर (बुधवार) | भाई-बहन का त्योहार; यमराज-यमुना पूजा |
| कार्तिक, शुक्ल षष्ठी | छठ पूजा — 15 नवंबर (रविवार) | सूर्य और छठी मइया का महापर्व; उगते-डूबते सूर्य को अर्घ्य |
| कार्तिक, शुक्ल एकादशी | देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी) — 20 नवंबर (शुक्रवार) | चतुर्मास की समाप्ति; विष्णु जागरण, शुभ कार्य पुनः आरंभ |
| कार्तिक, शुक्ल द्वादशी | तुलसी विवाह — 21 नवंबर (शनिवार) | तुलसी-शालिग्राम विवाह; विवाह और संस्कारों का पुनरारंभ |
| कार्तिक, शुक्ल पूर्णिमा | कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली — 24 नवंबर (मंगलवार) | गंगा-स्नान और दीपदान; कार्तिक मास का समापन |
करवा चौथ पर सुबह सरगी से लेकर रात चंद्र दर्शन तक निर्जला व्रत रखा जाता है। दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का सही क्रम लक्ष्मी पूजा विधि और देवउठनी के बाद तुलसी पूजा तुलसी पूजा विधि में देखें।
मार्गशीर्ष: सोमवार व्रत, विवाह पंचमी और गीता जयंती
मार्गशीर्ष को सोमवार व्रतों का मास कहा जाता है — कार्तिक पूर्णिमा के बाद यह मास शिव-आराधना और सत्संग के लिए जाना जाता है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| मार्गशीर्ष, सोमवार | मार्गशीर्ष सोमवार व्रत — 30 नवंबर तथा 7, 14, 21 दिसंबर (सोमवार) | शिव व्रत का विशेष फल; सोमवार कथा और जलाभिषेक |
| मार्गशीर्ष, शुक्ल पंचमी | विवाह पंचमी — 14 दिसंबर (सोमवार) | राम-सीता विवाह का उत्सव; शुभ विवाह मुहूर्त का आरंभ |
| मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी | मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती — 20 दिसंबर (रविवार) | कुरुक्षेत्र में भगवद्गीता का उपदेश; मोक्ष का व्रत |
| मार्गशीर्ष, शुक्ल पूर्णिमा | मार्गशीर्ष पूर्णिमा — 23 दिसंबर (बुधवार) | दत्तात्रेय जयंती और दान-स्नान का पुण्य दिन |
पौष: लोहड़ी, मकर संक्रांति और षट्तिला एकादशी
दिसंबर-जनवरी का सर्दी का मास — पौष — संक्रांति-पर्व और तिल-गुड़ के दान का मास है। मकर संक्रांति पर सूर्य का उत्तरायण और गंगा-स्नान का विशेष महत्व है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| पौष | लोहड़ी — 13 जनवरी (मंगलवार) | पंजाब-पश्चिमी उत्तर भारत का मकर-संक्रांति पर्व; अग्नि-दान |
| पौष, सूर्य संक्रांति | मकर संक्रांति, पोंगल — 14 जनवरी (बुधवार) | सूर्य का मकर राशि में प्रवेश; तिल-गुड़ दान और गंगा स्नान |
| पौष, कृष्ण एकादशी | षट्तिला एकादशी — 14 जनवरी (बुधवार) | छह प्रकार के तिलों से दान-पूजा; पाप-मोचन |
माघ: वसंत पंचमी, मौनी अमावस्या और माघ पूर्णिमा
माघ मास में सरस्वती पूजा से विद्या-आरंभ की परंपरा जुड़ी है, तो मौनी अमावस्या पर मौन-साधना और तीर्थ-स्नान का विधान है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| माघ, शुक्ल पंचमी | वसंत पंचमी, सरस्वती पूजा — 23 जनवरी (शुक्रवार) | वसंत ऋतु का आगमन; विद्यारंभ और वीणा-पूजन |
| माघ, शुक्ल एकादशी | जया एकादशी — 29 जनवरी (गुरुवार) | विजय और समृद्धि के लिए विष्णु व्रत |
| माघ, शुक्ल पूर्णिमा | माघ पूर्णिमा — 1 फरवरी (रविवार) | गंगा-स्नान, रुद्राभिषेक और दान का पुण्य दिन |
| माघ, कृष्ण अमावस्या | मौनी अमावस्या — 17 फरवरी (मंगलवार) | मौन व्रत और तीर्थ-स्नान; पितरों के लिए तर्पण |
फाल्गुन: महाशिवरात्रि और होली
हिंदू वर्ष का अंतिम मास फाल्गुन महाशिवरात्रि की रात्रि और रंगों के महोत्सव होली के साथ समाप्त होता है — इसके तुरंत बाद चैत्र नवरात्रि के साथ नया चक्र आरंभ हो जाता है।
| महीना | प्रमुख व्रत और त्योहार (तारीख) | विशेष महत्व |
|---|---|---|
| फाल्गुन, कृष्ण एकादशी | विजया एकादशी — 13 फरवरी (शुक्रवार) | विजय और सिद्धि के लिए राम-व्रत |
| फाल्गुन, कृष्ण चतुर्दशी | महाशिवरात्रि — 15 फरवरी (रविवार) | शिव-पार्वती विवाह; रात्रि-जागरण और जलाभिषेक |
| फाल्गुन, शुक्ल एकादशी | आमलकी एकादशी — 27 फरवरी (शुक्रवार) | आंवला वृक्ष की पूजा; आरोग्य और दीर्घायु का व्रत |
| फाल्गुन, शुक्ल पूर्णिमा | होलिका दहन — 3 मार्च (मंगलवार) | भक्त प्रह्लाद की रक्षा; बुराई पर अच्छाई की विजय |
| चैत्र, कृष्ण प्रतिपदा | होली (धुलेंडी) — 4 मार्च (बुधवार) | रंगों का त्योहार; वसंतोत्सव का उल्लास |
| चैत्र, कृष्ण एकादशी | पापमोचनी एकादशी — 15 मार्च (रविवार) | चैत्र कृष्ण एकादशी; पापों से मुक्ति का व्रत |
महाशिवरात्रि की रात जागरण करके शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है; रोज़ की शिव-आराधना शिव आरती से की जा सकती है।
व्रत कैसे रखें: सामान्य नियम
हर व्रत की विधि अलग होती है, लेकिन कुछ नियम सभी व्रतों में समान रहते हैं:
- संकल्प: व्रत शुरू करने से पहले स्नान करके देवता का स्मरण करें और मन ही मन व्रत का संकल्प लें। पूजा में संकल्प कैसे लें पढ़ें।
- भोजन-नियम: कुछ व्रतों में फलाहार, कुछ में एक समय भोजन और कुछ (जैसे निर्जला एकादशी) में जल-ग्रहण बंद रखते हैं। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही नियम चुनें।
- मन-व्रत: व्रत में क्रोध, झूठ, चोरी और अनावश्यक बातों से बचना व्रत का आधार है — केवल भोजन-रोक व्रत नहीं।
- जागरण और पाठ: जहां रात्रि-जागरण का विधान हो (महाशिवरात्रि, नवरात्रि), वहां भजन-कीर्तन और कथा-पाठ करें।
- पारणा: व्रत का समापन अगली तिथि के निर्धारित मुहूर्त में करें — एकादशी व्रत का पारणा द्वितीया तिथि में, अमावस्या/पूर्णिमा व्रत उसी दिन या अगले दिन पंचांग अनुसार।
- दान: व्रत के अंत में तिल, गुड़, अन्न या यथाशक्ति दान करने की परंपरा रही है।
घर पर व्रत-पूजा का सामान्य क्रम — स्नान, संकल्प, देव-पूजा, कथा, आरती और प्रसाद — पूजा विधि लेख में विस्तार से बताया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 का हिंदू नववर्ष कब से शुरू हो रहा है?
2026 में हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से शुरू हो रहा है — यही दिन गुड़ी पड़वा, उगादी और चैत्र नवरात्रि का पहला दिन भी है।
हर महीने कितने व्रत और त्योहार होते हैं?
पंचांग के अनुसार हर मास में दो एकादशी, दो पूर्णिमा, एक अमावस्या और तिथि-विशेष के व्रत होते हैं — औसतन 8 से 12 पर्व-व्रत प्रति मास। कार्तिक जैसे मासों में यह संख्या अधिक रहती है, जबकि चतुर्मास के मासों में विवाह जैसे शुभ कार्य रुक जाते हैं।
एकादशी व्रत और सोमवार व्रत में क्या अंतर है?
एकादशी व्रत मास में दो बार, विष्णु के सम्मान में और विशेष नियमों से रखा जाता है; सोमवार व्रत साप्ताहिक है और शिव आराधना से जुड़ा है। सावन के सोमवार व्रत की विधि सोमवार व्रत पूजा विधि में पढ़ें।
व्रत की तिथि एक दिन आगे-पीछे क्यों हो जाती है?
क्योंकि हिंदू तिथि सूर्योदय से सूर्योदय तक मानी जाती है और उदया-तिथि, स्थानीय सूर्योदय समय तथा परिवार-परंपरा (वैष्णव/स्मार्ता) के आधार पर अंतर आता है। इसीलिए राम नवमी या जन्माष्टमी जैसे पर्व कभी-कभी दो दिन मनाए जाते हैं — स्थानीय पंचांग ही अंतिम प्रमाण है।
दीपावली की लक्ष्मी पूजा कब करनी चाहिए?
दीपावली पर पूजा प्रदोष काल में अथवा अमावस्या की निशीथ (मध्यरात्रि) के आसपास की जाती है, पंचांग में दिए लक्ष्मी-पूजा मुहूर्त के अनुसार। 2026 में दीपावली और लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर (रविवार) को है। विस्तृत विधि लक्ष्मी पूजा विधि में पढ़ें।
क्या हर व्रत में पूरा दिन बिना खाए रहना जरूरी है?
नहीं। व्रत की तीव्रता व्रत के प्रकार पर निर्भर करती है — फलाहार व्रत, एक-समय भोजन व्रत, निर्जला व्रत और उपवास अलग-अलग होते हैं। बीमार, गर्भवती और बुजुर्ग व्यक्ति संतुलित आहार के साथ व्रत रखें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
निष्कर्ष
हिंदू व्रत और त्योहार केवल तिथियों की सूची नहीं — ये ऋतु-चक्र, परिवार और भक्ति को जोड़ने वाले अवसर हैं। Hindu Vrat aur Tyohar 2026 की इस महीने-वार सूची को अपने पंचांग के साथ रखें, ताकि हर व्रत की तिथि और विधि समय रहते याद रहे। तिथि स्थानीय पंचांग से पुष्टि करते रहें, और व्रत-पूजा के सही क्रम के लिए नीचे दिए लेख पढ़ें:
- पूजा विधि — घर पर हर पूजा का सम्पूर्ण क्रम।
- सोमवार व्रत पूजा विधि — सावन और सामान्य सोमवार व्रत की विधि।
- कलश स्थापना विधि — नवरात्रि और व्रत-अनुष्ठान के लिए।
- गणेश पूजा विधि — गणेश चतुर्थी और प्रत्येक व्रतारंभ में।
- लक्ष्मी पूजा विधि — दीपावली और वर्षा-समृद्धि की पूजा।
- तुलसी पूजा विधि — तुलसी विवाह और नित्य पूजा के लिए।
- पूजा में संकल्प कैसे लें — हर व्रत और अनुष्ठान की शुरुआत।