पूजा विधि

सोमवार व्रत पूजा विधि: पूजा सामग्री, नियम, मंत्र और व्रत कैसे करें

प्रकाशन: 1 अक्टूबर 2026 अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026 14 मिनट

सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं, मंत्र-जप करते हैं और सोमवार व्रत कथा पढ़ते या सुनते हैं। सोमवार व्रत साधारण सोमवार, सावन सोमवार और सोलह सोमवार के रूप में रखा जाता है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में व्रत की विधि और भोजन के नियमों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

व्रत की पूजा के साथ सामान्य पूजा-विधि भी जानने के लिए पूजा विधि — सम्पूर्ण मार्गदर्शिका पढ़ें।

सोमवार व्रत का महत्व

सोमवार का संबंध भगवान शिव से माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित करके भगवान शिव की आराधना की जाती है।

सोमवार व्रत रखने वाले भक्त दिनभर भगवान शिव का स्मरण करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार फलाहार या एक समय भोजन करते हैं। कई लोग मन की शांति, पारिवारिक सुख, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक अनुशासन के लिए यह व्रत रखते हैं।

सोलह सोमवार व्रत लगातार सोलह सोमवार तक रखा जाता है। कुछ लोग सावन के सभी सोमवार का व्रत रखते हैं और कुछ लोग अपनी पारिवारिक परंपरा या संकल्प के अनुसार किसी भी सोमवार से व्रत शुरू करते हैं।

व्रत का उद्देश्य केवल किसी इच्छा की पूर्ति नहीं, बल्कि संयम, भक्ति और भगवान शिव के प्रति समर्पण भी है।

सोमवार व्रत के प्रकार

सामान्य सोमवार व्रत

सामान्य सोमवार व्रत किसी भी सोमवार को रखा जा सकता है। इसमें भक्त सुबह पूजा करते हैं, दिनभर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखते हैं और शाम को पूजा या आरती के बाद फलाहार अथवा भोजन करते हैं।

सावन सोमवार व्रत

सावन के सोमवार भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं। इस दिन शिवलिंग पर जल, गंगाजल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। सावन सोमवार में मंदिर जाकर जलाभिषेक करने की भी परंपरा है।

सोलह सोमवार व्रत

सोलह सोमवार व्रत लगातार सोलह सोमवार तक रखा जाता है। प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, सोमवार व्रत कथा और आरती की जाती है। सोलह सोमवार पूरे होने के बाद कई परिवारों में उद्यापन करने की परंपरा है।

सोमवार व्रत की पूजा सामग्री

सोमवार व्रत की पूजा के लिए यह सामग्री तैयार कर सकते हैं:

  • भगवान शिव की मूर्ति, शिवलिंग या तस्वीर।
  • माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति।
  • पूजा की चौकी।
  • स्वच्छ कपड़ा।
  • शुद्ध जल।
  • गंगाजल।
  • दूध।
  • दही।
  • घी।
  • शहद।
  • शक्कर या मिश्री।
  • पंचामृत के लिए साफ पात्र।
  • बेलपत्र।
  • सफेद फूल।
  • चंदन।
  • अक्षत यानी साबुत चावल।
  • धूप या अगरबत्ती।
  • दीपक।
  • घी या तेल।
  • रुई की बाती।
  • कपूर।
  • फल।
  • मिठाई या सात्त्विक नैवेद्य।
  • पान और सुपारी, विस्तृत पूजा में।
  • मौली या कलावा।
  • आरती की थाली।
  • घंटी।
  • सोमवार व्रत कथा की पुस्तक या पाठ।

सामान्य सोमवार पूजा में सभी सामग्री होना आवश्यक नहीं है। शुद्ध जल, दीपक, बेलपत्र, पुष्प और भगवान शिव का नाम लेकर भी पूजा की जा सकती है। पूजा-सामग्री की पूरी सूची पूजा सामग्री लिस्ट लेख में मिल जाएगी।

सोमवार व्रत की तैयारी

सोमवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को रविवार रात से ही अगले दिन की तैयारी कर लेनी चाहिए। पूजा की सामग्री, फल, दूध और व्रत में उपयोग होने वाला भोजन पहले से रख लें।

सोमवार की सुबह:

  1. सूर्योदय से पहले या सुबह उठें।
  2. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  3. पूजा-स्थान को साफ करें।
  4. भगवान शिव और माता पार्वती की तस्वीर या मूर्ति रखें।
  5. पूजा की सभी सामग्री एक थाली में व्यवस्थित करें।
  6. व्रत रखने का संकल्प लें।

व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी शारीरिक क्षमता का ध्यान रखना चाहिए। बीमारी, गर्भावस्था, दवाइयों या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की स्थिति में कठोर उपवास न करें।

सोमवार व्रत की सुबह पूजा विधि

1. स्नान और स्वच्छता

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा-स्थान को साफ करें और भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग को व्यवस्थित करें।

2. दीपक और धूप जलाएं

घी या तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद धूप या अगरबत्ती लगाएं और भगवान शिव का ध्यान करें।

3. गणेशजी का स्मरण करें

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करें:

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभकार्येषु सर्वदा॥

4. संकल्प लें

दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव का ध्यान करें और संकल्प लें:

मैं श्रद्धा और भक्ति से सोमवार का व्रत और भगवान शिव की पूजा कर रहा/रही हूं। हे महादेव, मुझे संयम, सद्बुद्धि और भक्ति प्रदान करें तथा मेरे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें।

इसके बाद जल को किसी पात्र में छोड़ दें।

5. शिवलिंग पर जल चढ़ाएं

सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल या गंगाजल चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें:

ॐ नमः शिवाय।

जल धीरे-धीरे अर्पित करें और शिवलिंग की जलहरी का मार्ग खुला रखें।

6. पंचामृत से अभिषेक करें

विशेष सोमवार पूजा में शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाया जा सकता है। पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर या मिश्री मिलाएं।

पंचामृत अर्पित करने के बाद शिवलिंग पर दोबारा शुद्ध जल चढ़ाएं। दैनिक या सामान्य सोमवार पूजा में केवल जलाभिषेक करना भी पर्याप्त है।

7. दूध अर्पित करें

शिवलिंग पर थोड़ी मात्रा में दूध अर्पित करें। दूध चढ़ाने के बाद साफ जल अवश्य चढ़ाएं।

दूध अर्पित करते समय:

ॐ नमः शिवाय।

का जाप करें।

8. चंदन और अक्षत चढ़ाएं

शिवलिंग पर चंदन और साबुत अक्षत अर्पित करें। सोमवार व्रत की पूजा में चंदन का उपयोग भगवान शिव के पूजन में किया जाता है।

9. बेलपत्र और पुष्प चढ़ाएं

साफ जल से धोकर बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। सामान्य परंपरा में बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखा जाता है। बेलपत्र चढ़ाने का पूरा नियम शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम लेख में देखें।

बेलपत्र अर्पित करते समय पढ़ें:

त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्॥

इसके बाद सफेद फूल या उपलब्ध ताजे फूल अर्पित करें।

10. धूप और दीप अर्पित करें

धूप या अगरबत्ती भगवान शिव को अर्पित करें और दीपक जलाकर सामने रखें।

11. शिव मंत्र का जाप करें

सोमवार व्रत में भगवान शिव का सबसे प्रचलित मंत्र है:

ॐ नमः शिवाय।

इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी किया जा सकता है:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मंत्र का जाप अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार करें। 11, 21 या 108 बार जाप किया जा सकता है।

12. सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें

पूजा के बाद सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें। कई परिवारों में व्रत कथा को पूजा का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। कथा पढ़ते समय भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।

13. शिव आरती करें

कथा के बाद भगवान शिव की आरती करें। आरती के समय दीपक या कपूर का उपयोग करें और परिवार के सभी सदस्यों को पूजा में शामिल करें।

14. प्रसाद अर्पित करें

भगवान शिव को फल, मिठाई, दूध या सात्त्विक प्रसाद अर्पित करें। इसके बाद प्रसाद परिवार में बांटें।

सोमवार व्रत में क्या खाना चाहिए?

सोमवार व्रत में भोजन के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। सामान्य रूप से फलाहार में ये चीजें ली जाती हैं:

  • फल।
  • दूध।
  • दही।
  • मखाना।
  • साबूदाना।
  • कुट्टू का आटा।
  • सिंघाड़े के आटे की रोटी।
  • सामक के चावल।
  • आलू।
  • शकरकंद।
  • मूंगफली।
  • सूखे मेवे।
  • सेंधा नमक।

कुछ लोग पूरे दिन केवल फल और जल लेते हैं। कुछ लोग शाम की पूजा के बाद एक समय फलाहार करते हैं। कुछ परिवारों में व्रत खोलने के बाद सात्त्विक भोजन किया जाता है।

व्रत का भोजन अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।

सोमवार व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा के अनुसार इन खाद्य पदार्थों से बचते हैं:

  • सामान्य नमक।
  • गेहूं।
  • चावल।
  • दालें।
  • मांसाहारी भोजन।
  • अंडा।
  • शराब और नशीले पदार्थ।
  • प्याज और लहसुन।
  • बहुत अधिक तला-भुना भोजन।

व्रत में सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। हालांकि अलग-अलग परिवारों में व्रत के भोजन और नियम अलग हो सकते हैं।

फलाहार की पूरी सूची और व्रत-भोजन के नियम अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार रखें।

सोमवार व्रत कब खोलें?

सोमवार व्रत खोलने यानी पारण का समय आपकी व्रत-परंपरा पर निर्भर करता है। कई लोग शाम की पूजा और आरती के बाद फलाहार करके व्रत खोलते हैं। कुछ लोग सूर्यास्त के बाद भोजन करते हैं और कुछ परिवारों में अगले दिन पारण की परंपरा होती है।

सामान्य सोमवार व्रत में पूजा, कथा और आरती के बाद फल, दूध या सात्त्विक भोजन ग्रहण किया जा सकता है। सोलह सोमवार, सावन सोमवार या किसी विशेष संकल्प-व्रत में पारण की विधि अपनी परंपरा के अनुसार रखें।

शाम की सोमवार पूजा विधि

यदि सुबह पूजा हो चुकी हो तो शाम को संक्षिप्त पूजा की जा सकती है।

शाम की पूजा का क्रम

  1. हाथ-पैर धोकर पूजा-स्थान पर जाएं।
  2. दीपक जलाएं।
  3. धूप या अगरबत्ती लगाएं।
  4. भगवान शिव को पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें।
  5. “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
  6. सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  7. शिव आरती करें।
  8. भगवान को फल या प्रसाद अर्पित करें।
  9. प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।

यदि सुबह पूजा नहीं हो पाई हो तो शाम को जलाभिषेक के साथ पूजा की जा सकती है।

सोमवार व्रत के सामान्य नियम

  • व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें।
  • पूजा-स्थान को साफ रखें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
  • शिवलिंग पर जल धीरे-धीरे चढ़ाएं।
  • बेलपत्र साफ करके अर्पित करें।
  • व्रत में अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार करें।
  • क्रोध, झूठ, अपशब्द और विवाद से बचें।
  • दिनभर भगवान शिव का नाम-स्मरण करें।
  • शाम को पूजा, कथा और आरती करें।
  • व्रत खोलते समय सात्त्विक भोजन लें।
  • भोजन और जल का अपमान न करें।
  • पूजा के दौरान दीपक और कपूर को सुरक्षित रखें।

सोमवार व्रत केवल भोजन न करने का नाम नहीं है। इस दिन मन, वाणी और व्यवहार में भी संयम रखने की परंपरा है।

सोलह सोमवार व्रत विधि

सोलह सोमवार व्रत में लगातार सोलह सोमवार तक भगवान शिव की पूजा की जाती है। प्रत्येक सोमवार को सुबह स्नान करके संकल्प लिया जाता है और शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है।

सोलह सोमवार का सामान्य क्रम

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
  3. व्रत का संकल्प लें।
  4. जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें।
  5. बेलपत्र, चंदन और फूल अर्पित करें।
  6. “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
  7. सोमवार व्रत कथा पढ़ें।
  8. शिव आरती करें।
  9. फलाहार या पारंपरिक व्रत-भोजन करें।
  10. सोलहवें सोमवार के बाद अपनी परंपरा के अनुसार उद्यापन करें।

कुछ परंपराओं में सोलह सोमवार के दौरान मिट्टी से शिवलिंग बनाकर पूजा करने की विधि भी बताई जाती है। यह सभी परिवारों में अनिवार्य नहीं है।

सोमवार व्रत का उद्यापन

सोलह सोमवार या किसी विशेष संकल्प के पूरा होने के बाद उद्यापन किया जाता है। उद्यापन की विधि परिवार, क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

सामान्य रूप से उद्यापन में ये कार्य किए जाते हैं:

  • भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा।
  • शिवलिंग का अभिषेक।
  • बेलपत्र और पुष्प अर्पित करना।
  • सोमवार व्रत कथा।
  • शिव आरती।
  • नैवेद्य और प्रसाद।
  • ब्राह्मण, कन्या या जरूरतमंदों को भोजन, अपनी परंपरा के अनुसार।
  • दक्षिणा या दान।

उद्यापन की निश्चित विधि के लिए अपने परिवार की परंपरा का पालन करें।

सोमवार व्रत में भगवान शिव को क्या चढ़ाएं?

सोमवार की पूजा में भगवान शिव को ये सामग्री अर्पित की जा सकती है:

  • शुद्ध जल।
  • गंगाजल।
  • दूध।
  • पंचामृत।
  • बेलपत्र।
  • सफेद फूल।
  • चंदन।
  • अक्षत।
  • धतूरा, परंपरा के अनुसार।
  • आक के फूल, परंपरा के अनुसार।
  • फल।
  • दूध से बनी मिठाई।
  • धूप।
  • दीप।

इनमें से सभी चीजें चढ़ाना आवश्यक नहीं है। दैनिक सोमवार पूजा में जल, बेलपत्र, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य पर्याप्त हैं। घर पर शिव पूजा की पूरी विधि भगवान शिव पूजा विधि लेख में देखें।

सोमवार व्रत में क्या नहीं चढ़ाएं?

सामान्य शिव पूजा में इन बातों का ध्यान रखें:

  • गंदे या बासी फूल न चढ़ाएं।
  • कटा-फटा बेलपत्र न चढ़ाएं।
  • जलहरी का मार्ग बंद न करें।
  • तस्वीर पर सीधे जल या दूध न डालें।
  • पूजा-स्थान पर बहुत अधिक दूध या पंचामृत जमा न होने दें।
  • अपनी पारिवारिक परंपरा में निषिद्ध मानी जाने वाली सामग्री का उपयोग न करें।
  • पूजा-सामग्री को पैरों के नीचे न आने दें।

शिव पूजा की सामग्री और निषेधों को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अंतर मिल सकता है। घर में चली आ रही पूजा-विधि का सम्मान करें।

रोज की सामान्य पूजा के नियम अपनी परंपरा के अनुसार रखें।

सोमवार व्रत के मंत्र

पंचाक्षरी मंत्र

ॐ नमः शिवाय।

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव ध्यान मंत्र

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

भगवान शिव का नाम-स्मरण

हर हर महादेव।
ॐ नमः शिवाय।

व्रत के दौरान इनमें से किसी एक मंत्र का नियमित जाप किया जा सकता है। दोनों मंत्रों का सही पाठ, अर्थ और जाप-विधि शिव पूजा मंत्र लेख में पढ़ें।

सोमवार व्रत कथा

सोमवार व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ी व्रत कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है। कथा सुनने के बाद भगवान शिव की आरती और प्रार्थना की जाती है।

कथा का पाठ करते समय:

  • पूजा-स्थान के सामने बैठें।
  • दीपक जलाएं।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
  • कथा ध्यानपूर्वक पढ़ें या सुनें।
  • अंत में आरती करें।
  • प्रसाद बांटें।

सोमवार व्रत की कथा के अलग-अलग क्षेत्रीय रूप प्रचलित हैं। इसलिए अपने परिवार या क्षेत्र में पढ़ी जाने वाली प्रमाणित सोमवार व्रत कथा का उपयोग करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोमवार का व्रत कब रखा जाता है?

सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा के लिए व्रत रखा जाता है। सावन के सोमवार और सोलह सोमवार व्रत की अपनी अलग परंपरा होती है।

सोमवार व्रत में पूजा कब करनी चाहिए?

सुबह स्नान के बाद पूजा करना सामान्य है। शाम को भी दीपक, मंत्र-जाप, कथा और आरती के साथ पूजा की जा सकती है।

सोमवार व्रत में क्या खा सकते हैं?

फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, सामक के चावल, आलू और सेंधा नमक का उपयोग अपनी व्रत-परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।

क्या सोमवार व्रत में नमक खा सकते हैं?

व्रत में सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। कुछ लोग नमक का सेवन नहीं करते। अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार निर्णय लें।

क्या सोमवार व्रत में पानी पी सकते हैं?

अधिकांश लोग सोमवार व्रत में पानी पीते हैं। निर्जल व्रत रखने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति का ध्यान रखें।

क्या सोमवार व्रत में दूध पी सकते हैं?

फलाहार करने वाले लोग सोमवार व्रत में दूध पीते हैं। दूध से बनी चीजें भी कई परिवारों में फलाहार का हिस्सा होती हैं।

सोमवार व्रत में शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?

शिवलिंग पर शुद्ध जल, गंगाजल, दूध, पंचामृत, चंदन, अक्षत, बेलपत्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित किए जा सकते हैं।

सोमवार व्रत में कितने बेलपत्र चढ़ाने चाहिए?

बेलपत्र की संख्या के लिए अलग-अलग परंपराएं हैं। एक, तीन, पांच, ग्यारह या इक्कीस बेलपत्र चढ़ाए जाते हैं। दैनिक पूजा में एक साफ बेलपत्र भी पर्याप्त है।

क्या सोमवार व्रत में शिवलिंग पर दूध चढ़ाना जरूरी है?

नहीं, दूध चढ़ाना जरूरी नहीं है। शुद्ध जल से जलाभिषेक करके भी भगवान शिव की पूजा की जा सकती है।

क्या सोमवार व्रत में व्रत कथा पढ़ना जरूरी है?

कई परिवारों में व्रत कथा को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा के बाद सोमवार व्रत कथा पढ़ना या सुनना परंपरा के अनुसार किया जाता है।

सोमवार व्रत कब खोलना चाहिए?

सामान्य रूप से शाम की पूजा और आरती के बाद फलाहार या सात्त्विक भोजन करके व्रत खोला जाता है। आपकी पारिवारिक परंपरा में अलग नियम हो सकते हैं।

क्या महिलाएं सोमवार व्रत रख सकती हैं?

हां, महिलाएं सोमवार व्रत रखती हैं। व्रत से जुड़े व्यक्तिगत और पारिवारिक नियम अपनी परंपरा के अनुसार रखें।

क्या बीमारी में सोमवार व्रत रखना चाहिए?

बीमारी, गर्भावस्था, दवाइयों या कमजोरी की स्थिति में कठोर उपवास न करें। फलाहार या सामान्य सात्त्विक भोजन के साथ भगवान शिव की पूजा की जा सकती है।

क्या सोमवार व्रत बिना पंडित के कर सकते हैं?

सामान्य सोमवार व्रत और शिव पूजा घर पर की जा सकती है। विशेष अनुष्ठान या उद्यापन में परिवार की परंपरा के अनुसार पंडित की सहायता ली जा सकती है।

निष्कर्ष

सोमवार व्रत भगवान शिव की भक्ति, संयम और आत्म-अनुशासन से जुड़ा व्रत है। सुबह स्नान करके पूजा-स्थान साफ करें, भगवान शिव का संकल्प लें और शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद चंदन, अक्षत, बेलपत्र, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करके सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में शिव आरती करें। अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या व्रत-भोजन करें और शाम की पूजा के बाद व्रत खोलें।

सोमवार व्रत की विधि परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए पूजा और भोजन से जुड़े विशेष नियमों में अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दें।