मंत्र और पाठ

शिव पूजा मंत्र: ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र

प्रकाशन: 1 अक्टूबर 2026 अंतिम अपडेट: 1 अक्टूबर 2026 9 मिनट

भगवान शिव की पूजा में “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का विशेष स्थान है। “ॐ नमः शिवाय” भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र है, जबकि महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव के त्र्यम्बक स्वरूप की स्तुति करता है। दोनों मंत्रों का जाप सोमवार, प्रदोष, महाशिवरात्रि, सावन और दैनिक शिव पूजा में किया जा सकता है।

ॐ नमः शिवाय मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

यह भगवान शिव का सबसे प्रसिद्ध और सरल मंत्र है। इसमें “ॐ” परम चेतना का प्रतीक है और “नमः शिवाय” का अर्थ भगवान शिव को नमस्कार या समर्पण है।

“नमः शिवाय” को पंचाक्षरी मंत्र कहा जाता है, क्योंकि इसमें पांच अक्षर माने जाते हैं—न, म, शि, वा, य। “ॐ” को जोड़कर इसका प्रचलित रूप “ॐ नमः शिवाय” बनता है।

ॐ नमः शिवाय का अर्थ

ॐ नमः शिवाय का सरल अर्थ है:

मैं भगवान शिव को नमन करता/करती हूं और स्वयं को उनके चरणों में समर्पित करता/करती हूं।

भगवान शिव का नाम-जप मन को एकाग्र करने और पूजा के दौरान ध्यान स्थिर करने में सहायता करता है। इसका जाप जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पित करते समय, आरती से पहले या ध्यान के दौरान किया जा सकता है।

ॐ नमः शिवाय का जाप कैसे करें?

शिव मंत्र का जाप करने के लिए किसी विशेष कठिन विधि की आवश्यकता नहीं होती। शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर भगवान शिव का ध्यान करें।

जाप की सरल विधि

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. पूजा-स्थान के सामने आसन पर बैठें।
  3. दीपक और धूप जलाएं।
  4. भगवान शिव या शिवलिंग का ध्यान करें।
  5. मन को शांत करके “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
  6. जाप के बाद भगवान शिव को प्रणाम करें।

आप अपनी सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं:

  • 11 बार।
  • 21 बार।
  • 51 बार।
  • 108 बार।
  • अपनी श्रद्धा और समय के अनुसार अधिक बार।

दैनिक पूजा में जाप की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण नियमितता और एकाग्रता है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय मंत्र

शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए लगातार या प्रत्येक अर्पण के साथ यह मंत्र पढ़ें:

ॐ नमः शिवाय॥

जलाभिषेक का सरल क्रम

  1. शिवलिंग के नीचे जलहरी या थाली रखें।
  2. लोटे में शुद्ध जल या गंगाजल लें।
  3. भगवान शिव का ध्यान करें।
  4. धीरे-धीरे जल चढ़ाएं।
  5. “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
  6. इसके बाद बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें।
  7. धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं।
  8. शिव आरती करें।

शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से पहले जलाभिषेक करने की परंपरा है। बेलपत्र का चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखकर अर्पित किया जाता है। बेलपत्र चढ़ाने का पूरा नियम और मंत्र शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने का सही नियम लेख में पढ़ें।

महामृत्युंजय मंत्र

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव के त्र्यम्बक स्वरूप को समर्पित वैदिक मंत्र है। इसे त्र्यम्बक मंत्र या मृत्युंजय मंत्र भी कहा जाता है। यह मंत्र ऋग्वेद के सातवें मंडल, 59वें सूक्त के 12वें मंत्र में मिलता है और यजुर्वेद में भी इसका पाठ मिलता है।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मंत्र के पाठ में वैदिक स्वर-चिह्नों और लिखने की परंपरा के अनुसार छोटे अंतर दिखाई दे सकते हैं। सामान्य पूजा और पाठ में ऊपर दिया गया प्रचलित देवनागरी पाठ उपयोग किया जाता है।

महामृत्युंजय मंत्र का सरल अर्थ

हम उन तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की उपासना करते हैं, जो सुगंध की तरह सर्वत्र व्याप्त हैं और सभी का पोषण करते हैं। जिस प्रकार पक चुका फल अपनी बेल के बंधन से अलग हो जाता है, उसी प्रकार भगवान शिव हमें मृत्यु और भय के बंधन से मुक्त करें और अमृतस्वरूप सत्य का अनुभव कराएं।

यह मंत्र जीवन, स्वास्थ्य, शांति और भय से मुक्ति की प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है। इसे किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए; स्वास्थ्य समस्या होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें?

सरल जाप विधि

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ स्थान पर बैठें।
  2. सामने भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग रखें।
  3. दीपक जलाएं।
  4. भगवान शिव का ध्यान करें।
  5. महामृत्युंजय मंत्र का स्पष्ट उच्चारण करें।
  6. अपनी सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप करें।
  7. अंत में भगवान शिव से स्वास्थ्य, शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना करें।

आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप:

  • 3 बार।
  • 11 बार।
  • 21 बार।
  • 51 बार।
  • 108 बार।

कर सकते हैं। किसी विशेष अनुष्ठान में जाप की संख्या और नियम अलग हो सकते हैं।

शिव पूजा में दोनों मंत्रों का उपयोग

दैनिक शिव पूजा में दोनों मंत्रों का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है:

  1. गणेशजी का स्मरण।
  2. भगवान शिव का ध्यान।
  3. शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए “ॐ नमः शिवाय” का जाप।
  4. बेलपत्र और पुष्प अर्पित करना।
  5. महामृत्युंजय मंत्र का पाठ।
  6. धूप और दीप अर्पित करना।
  7. नैवेद्य लगाना।
  8. शिव आरती।
  9. प्रणाम और प्रार्थना।

यदि समय कम हो तो केवल “ॐ नमः शिवाय” का जाप करके भी पूजा की जा सकती है। शिव पूजा की पूरी विधि भगवान शिव पूजा विधि लेख में देखें।

सोमवार को शिव मंत्र जाप

सोमवार भगवान शिव की पूजा का प्रमुख दिन माना जाता है। सोमवार को सुबह या शाम शिवलिंग के सामने बैठकर “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।

सोमवार पूजा का सरल मंत्र क्रम

समय मंत्र
जलाभिषेक के समय ॐ नमः शिवाय
बेलपत्र चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय
पूजा के बाद महामृत्युंजय मंत्र
आरती के अंत में हर हर महादेव

सोमवार व्रत रखने वाले भक्त पूजा के बाद सोमवार व्रत कथा और भगवान शिव की आरती भी पढ़ सकते हैं। सोमवार व्रत की पूजा विधि और नियम सोमवार व्रत पूजा विधि लेख में पढ़ें।

सावन में शिव मंत्र जाप

सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जाता है। सावन सोमवार, प्रदोष और महाशिवरात्रि पर महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी किया जा सकता है।

सावन पूजा का क्रम

  1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. भगवान शिव का ध्यान करें।
  3. जल या गंगाजल से अभिषेक करें।
  4. “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
  5. बेलपत्र और पुष्प अर्पित करें।
  6. महामृत्युंजय मंत्र पढ़ें।
  7. धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  8. शिव आरती करें।

रुद्राक्ष माला से मंत्र जाप

मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष माला का उपयोग शिव उपासना में किया जाता है। सामान्य रूप से 108 दानों वाली माला का उपयोग किया जाता है।

माला से जाप का सामान्य तरीका

  1. माला को स्वच्छ स्थान पर रखें।
  2. अंगूठे और मध्यमा उंगली से दाने फेरें।
  3. तर्जनी उंगली का उपयोग न करें।
  4. प्रत्येक दाने पर एक बार मंत्र पढ़ें।
  5. सुमेरु दाने पर पहुंचकर माला को उलट दें।
  6. सुमेरु को पार करके आगे न बढ़ें।

यदि माला उपलब्ध न हो तो बिना माला के भी मंत्र जाप किया जा सकता है।

मंत्र जाप के समय ध्यान रखने वाली बातें

  • मंत्र का उच्चारण स्पष्ट रखें।
  • जल्दबाजी में मंत्र न पढ़ें।
  • जाप करते समय मन को भगवान शिव पर केंद्रित रखें।
  • पूजा-स्थान साफ रखें।
  • माला को पैरों से दूर रखें।
  • मंत्र जाप के दौरान अनावश्यक बातचीत न करें।
  • जाप के बाद कुछ क्षण शांत बैठें।
  • किसी विशेष अनुष्ठान के नियमों को सामान्य दैनिक जाप पर लागू न करें।

क्या मंत्र का जाप मन ही मन कर सकते हैं?

हां, मंत्र का जाप तीन प्रकार से किया जा सकता है:

  • वाचिक जाप: मंत्र को आवाज में पढ़ना।
  • उपांशु जाप: बहुत धीमी आवाज में पढ़ना।
  • मानसिक जाप: मन ही मन मंत्र का स्मरण करना।

दैनिक पूजा में इन तीनों में से किसी भी प्रकार का जाप किया जा सकता है। जिस तरीके से आपका ध्यान अधिक स्थिर रहे, उसे अपनाएं।

क्या महामृत्युंजय मंत्र रोज पढ़ सकते हैं?

हां, महामृत्युंजय मंत्र का पाठ दैनिक पूजा में किया जा सकता है। इसे सुबह, शाम, सोमवार, प्रदोष, सावन या किसी विशेष प्रार्थना के समय पढ़ा जाता है।

दैनिक पाठ के लिए 3, 11 या 21 बार जाप किया जा सकता है। विशेष अनुष्ठान में संख्या, समय और नियम अलग हो सकते हैं।

क्या शिव मंत्र का जाप बिना पूजा के कर सकते हैं?

हां, शिव मंत्र का जाप करने के लिए हर बार विस्तृत पूजा करना आवश्यक नहीं है। स्वच्छ और शांत स्थान पर बैठकर भगवान शिव का ध्यान करते हुए “ॐ नमः शिवाय” का जाप किया जा सकता है।

यात्रा, बीमारी या व्यस्तता में मन ही मन भगवान शिव का नाम-स्मरण भी किया जा सकता है।

मंत्र जाप के बाद प्रार्थना

मंत्र जाप के बाद यह सरल प्रार्थना कर सकते हैं:

हे भगवान शिव, मेरे मन को शांति दें, मुझे सही मार्ग पर चलने की शक्ति दें और मेरे परिवार को सुख, स्वास्थ्य और सद्बुद्धि प्रदान करें। सभी प्राणियों का कल्याण करें।

इसके बाद भगवान शिव को प्रणाम करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भगवान शिव का सबसे सरल मंत्र कौन सा है?

भगवान शिव का सबसे सरल और प्रचलित मंत्र है:

ॐ नमः शिवाय॥

महामृत्युंजय मंत्र कब पढ़ना चाहिए?

महामृत्युंजय मंत्र सुबह, शाम, सोमवार, प्रदोष, सावन, महाशिवरात्रि और विशेष प्रार्थना के समय पढ़ा जा सकता है।

महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार पढ़ना चाहिए?

दैनिक पूजा में 3, 11, 21 या 108 बार पढ़ सकते हैं। विशेष अनुष्ठान में जाप की संख्या अलग हो सकती है।

क्या ॐ नमः शिवाय का जाप बिना माला के कर सकते हैं?

हां, बिना माला के भी मंत्र जाप किया जा सकता है। माला केवल जाप की गिनती और एकाग्रता में सहायता करती है।

क्या महिलाएं शिव मंत्र का जाप कर सकती हैं?

हां, महिलाएं भगवान शिव के मंत्रों का जाप कर सकती हैं। पूजा से जुड़े विशेष पारिवारिक नियम अलग हो सकते हैं।

क्या बच्चे ॐ नमः शिवाय मंत्र पढ़ सकते हैं?

हां, बच्चे सरल रूप से “ॐ नमः शिवाय” का जाप कर सकते हैं। उन्हें मंत्र का उच्चारण और अर्थ समझाकर जाप कराना अच्छा रहता है।

क्या शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए महामृत्युंजय मंत्र पढ़ सकते हैं?

हां, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय महामृत्युंजय मंत्र का पाठ किया जा सकता है। जलाभिषेक के लिए “ॐ नमः शिवाय” का जाप भी प्रचलित है।

क्या महामृत्युंजय मंत्र बीमारी ठीक कर देता है?

महामृत्युंजय मंत्र स्वास्थ्य और शांति की प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है। यह चिकित्सा का विकल्प नहीं है। बीमारी में डॉक्टर की सलाह और उपचार जारी रखना चाहिए।

क्या रात में शिव मंत्र का जाप कर सकते हैं?

हां, रात में शांत स्थान पर भगवान शिव का ध्यान करके मंत्र-जाप किया जा सकता है। सोने से पहले मानसिक रूप से “ॐ नमः शिवाय” का स्मरण भी कर सकते हैं।

क्या महामृत्युंजय मंत्र का जाप कोई भी कर सकता है?

सामान्य रूप से महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भक्त श्रद्धा से करते हैं। विशेष तांत्रिक या दीक्षा-आधारित प्रयोगों की विधि अलग हो सकती है और उन्हें गुरु-मार्गदर्शन में किया जाता है।

निष्कर्ष

“ॐ नमः शिवाय” भगवान शिव का सरल और प्रचलित पंचाक्षरी मंत्र है। इसका जाप दैनिक पूजा, सोमवार, सावन, प्रदोष और महाशिवरात्रि में किया जा सकता है।

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव के त्र्यम्बक स्वरूप की स्तुति करता है और स्वास्थ्य, शांति तथा भय से मुक्ति की प्रार्थना के रूप में पढ़ा जाता है। शिव पूजा में जलाभिषेक के समय “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें और उसके बाद महामृत्युंजय मंत्र का पाठ कर सकते हैं।

मंत्रों का जाप शांत मन, श्रद्धा और नियमितता से करें। पूजा के अंत में भगवान शिव से अपने परिवार और सभी प्राणियों के कल्याण की प्रार्थना करें।