श्री बृहस्पति चालीसा
बृहस्पति देव को देवताओं का गुरु कहा जाता है। उनकी पूजा में ज्ञान, अच्छी बुद्धि और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है। गुरुवार के दिन भक्त पीले फूल, हल्दी और चने की दाल अर्पित करके श्री बृहस्पति चालीसा पढ़ते हैं।
गुरु बृहस्पति चालीसा का पूरा हिंदी पाठ नीचे दिया गया है। इसके बाद पाठ का समय, पूजा की सामग्री और आसान विधि भी दी गई है, ताकि पहली बार पाठ करने वाले भी तैयारी कर सकें।
श्री गुरु बृहस्पति देव चालीसा
॥ दोहा ॥
गाउे नित मंगलाचरण, गणपति मेरे नाथ ।
करो कृपा माँ शारदा, जीव रहें मेरे साथ ॥
॥ चौपाई ॥
वीर देव भक्तन हितकारी ।
सुर नर मुनिजन के उद्धारी ।
वाचस्पति सुर गुरू पुरोहित ।
कमलासन बृहस्पति विराजित ॥
स्वर्ण दंड वर मुद्रा धारी ।
पात्र माल शोभित भुज चारी ।
है स्वर्णिम आवास तुम्हारा ।
पीत वदन देवों में न्यारा ॥
स्वर्णारथ प्रभु अति ही सुखकर ।
पाण्डुर वर्ण अश्व चले जुतकर ।
स्वर्ण मुकुट पीताम्बर धारी ।
अंगिरा नन्दन गगन विहारी ॥
अज अगम्य अविनाशी स्वामी ।
अनन्त वरिष्ठ सर्वज्ञ नामी ।
श्रीमत् धर्म रूप धन दाता ।
शरणागत सर्वापद् त्राता ॥
पुष्य नाथ ब्रह्म विद्या विशारद ।
गुण बरने सुर गण मुनि नारद ।
कठिन तप प्रभास में कीन्हा ।
शंकर प्रसन्न हो वर दीन्हा ॥
देव गुरू ग्रह पति कहाओ ।
निर्मल मति वाचस्पति पाओ ।
असुर बने सुर यज्ञ विनाशक ।
करें सुरक्षित मन्त्र से सुर मख ॥
बनकर देवों के उपकारी ।
दैत्य विनाशे विघ्न निवारी ।
बृहस्पति धनु मीन के नायक ।
लोक द्विज नय बुद्धि प्रदायक ॥
मावस वीर वार ब्रत धारे ।
आश्रय दें सर्व पाप निवारें ।
पीताम्बर हल्दी पीला अन्न ।
शक्कर मधु पुखराज भू-लवण ॥
पुस्तक स्वर्ण अश्व दान कर ।
ददेवें जीव अनेक सुखद वर ।
विद्या सिन्धु स्वयं कहलाते ।
भक्तों को सन्मार्ग चलाते ॥
इन्द्र किया अपमान अकारण ।
विश्वरूपा गुरू किये धारण ।
बढ़ा कष्ट सब राज गँवाया ।
दानव ध्वज स्वर्ग लहराया ॥
क्षमा माँग फिर स्तुति कीन्ही ।
विपदा सकल जीव हर लीन्ही ।
बढ़ा देवों में मान तुम्हारा ।
कीरति गावें सकल संसारा ॥
दोष बिसार शरण में लीजै ।
उर आनन्द प्रभु भर दीजै ।
सदगुरू तेरी प्रबल माया ।
तेरा पारा ना कोई पाया ॥
सब तीर्थ गुरू चरण समाये ।
समझे विरला बहु सुख पाये ।
अमृत वारिद सदृश वाणी ।
हिरदय धार भए ब्रह्ज्ञानी ॥
शोभा मुख से बरनि न जाईं ।
देवें भक्ति जीव मनचाही ।
जो अनाथ ना कोइ सहाई ।
लख चोरासी पार कराहीं ॥
प्रथम गुरू का पूजन कीजे ।
गुरू चरणामृत रुच-रुच पीजै ।
मृग तृष्णा गुरू दरशन राखी ।
मिले मुक्ति हो सब जग साखी ॥
चरणन रज सतूगुरु सिर धारे ।
पा गए दास पदारथ सारे ।
जग के कार विहारण दोड़े ।
गुरू मोह के बन्धन तोड़े ॥
पारस माणिक नीलम रत्ना ।
गुरूवर सम्मुख व्यर्थ कल्पना ।
कर निष्काम भक्ति गुरुवर की ।
सुन्दर छवि धारे सुखकर की ॥
गुरू पताका जो फहारायें ।
मन क्रम वचन ध्यान से ध्यायें ।
काल रूप यम नहीं सतावें ।
निश्चय गुरुवर पिंड छुड़ावें ॥
भूत पिशाच्र निकट ना आवें ।
रोगी रोग मुक्त हो जावें ।
संतती हीन संस्तुति गावें ।
मंगल होय पुत्र धन पावें ॥
“मन! गुण गाहिरदय हर्षावे ।
स्नेह जीव चरणों में लावे ।
जीव चालीसा पढ़े पढ़ावे ।
पूर्ण शांति को पल में पावें ॥
॥ दोहा ॥
मात पिता के संग मनु, गुरू चरण में लीन ।
किरपा सब पर कीजिये, जान जगत में दीन ॥
॥ इति श्री बृहस्पति चालीसा ॥
बृहस्पति चालीसा पढ़ने का समय
बृहस्पति देव की पूजा के लिए गुरुवार का दिन विशेष है। पाठ शुरू करने के लिए गुरुवार की सुबह स्नान के बाद का समय चुन सकते हैं। पहले पूजा की जगह साफ करें, फिर आसन पर बैठकर बृहस्पति देव का स्मरण करें।
पाठ के लिए ऐसा समय रखें जब आप आराम से बैठकर पूरी चालीसा पढ़ सकें। जल्दी-जल्दी पंक्तियाँ खत्म करने के बजाय हर पंक्ति साफ बोलें। पहली बार पढ़ रहे हों तो धीरे पढ़ें और कठिन शब्दों पर थोड़ा समय दें।
बृहस्पति पूजा की सामग्री
पाठ शुरू करने से पहले पूजा की चीजें पास रख लें, ताकि बीच में बार-बार उठना न पड़े। सामान्य पूजा के लिए ये चीजें रख सकते हैं:
- बृहस्पति देव का चित्र और बैठने के लिए साफ आसन।
- दीपक, घी और रुई की बत्ती।
- पीले फूल और हल्दी।
- चने की दाल और गुड़।
- पूजा के लिए साफ जल।
- प्रसाद रखने के लिए साफ थाली या कटोरी।
पीले वस्त्र और पीला आसन इस पूजा की परंपरा से जुड़े हैं। अपने घर में चली आ रही पूजा-पद्धति के अनुसार सामग्री रखें।
बृहस्पति चालीसा पढ़ने की विधि
- पूजा की तैयारी करें: स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा की जगह व्यवस्थित करें। बृहस्पति देव का चित्र सामने रखें।
- दीपक जलाएँ: आसन पर बैठकर घी का दीपक जलाएँ। पीले फूल, हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें।
- स्मरण और प्रार्थना करें: गणेश जी का स्मरण करें। फिर बृहस्पति देव से अच्छी बुद्धि, सही मार्गदर्शन और परिवार के मंगल की प्रार्थना करें।
- पूरा पाठ पढ़ें: आरंभिक दोहे से शुरू करें। उसके बाद सभी चौपाइयाँ क्रम से पढ़ें और अंत का दोहा भी पढ़ें।
- पूजा पूरी करें: पाठ के बाद अपनी परंपरा के अनुसार आरती करें, प्रणाम करें और प्रसाद बाँटें। अपनी इच्छा और सामर्थ्य से दान भी कर सकते हैं।
बृहस्पति देव का मंत्र
बृहस्पति देव की पूजा में यह छोटा मंत्र भी पढ़ा जाता है:
ॐ बृं बृहस्पतये नमः।
मंत्र-जप को पूजा में शामिल करना चाहें तो चालीसा से पहले इसका जप कर सकते हैं। 108 बार जप के लिए माला का उपयोग कर सकते हैं। मंत्र-जप और चालीसा अलग पाठ हैं; चालीसा पढ़ते समय उसका आरंभिक दोहा और समापन दोहा दोनों पढ़ें।
बृहस्पति चालीसा के पाठ का महत्व
बृहस्पति देव की भक्ति में ज्ञान, पढ़ाई, गुरु का सम्मान और सही फैसले लेने की प्रार्थना प्रमुख है। पढ़ने वाले विद्यार्थी अच्छी समझ के लिए और गृहस्थ अपने परिवार की सुख-शांति के लिए उनका स्मरण करते हैं।
धार्मिक परंपरा में गुरु की कृपा को विद्या, समृद्धि और पारिवारिक सुख से जोड़ा जाता है। इसी श्रद्धा से भक्त गुरुवार की पूजा में बृहस्पति चालीसा का पाठ करते हैं। पूजा के साथ अपने शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करना तथा जरूरतमंद की मदद करना भी इस भावना को जीवन में उतारने का तरीका है।
गुरु बृहस्पति और उनका ज्योतिष से संबंध
ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु कहा जाता है। उनका संबंध ज्ञान, शिक्षा, धर्म और मार्गदर्शन से है। अन्य ग्रहों के साथ उनकी भूमिका समझने के लिए नौ ग्रहों के कारकत्व वाला लेख पढ़ सकते हैं।
बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी हैं। चालीसा में भी इन दोनों राशियों का नाम आता है। किस राशि का स्वामी कौन-सा ग्रह है, इसकी पूरी सूची 12 राशियों के नाम और उनके स्वामी ग्रह में दी गई है।